हरिद्वार (प्रवीण कुमार)चाररधाम यात्रा शुरू होने के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग की सक्रियता अचानक बढ़ गई है। विभाग ने पैकेज्ड पेयजल निर्माण इकाइयों, ढाबों और खाद्य प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई करते हुए नोटिस जारी किए हैं और एक कैंटीन संचालक के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया है। हालांकि इस कार्रवाई के बाद विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
निरीक्षण के दौरान जिन पानी की फैक्ट्रियों में जरूरी लैब रिपोर्ट, फूड ग्रेड सर्टिफिकेट और अन्य अनिवार्य दस्तावेज नहीं मिले, वे कोई नई इकाइयां नहीं हैं। स्थानीय लोगों का सवाल है कि यदि इतने महत्वपूर्ण दस्तावेज लंबे समय से उपलब्ध नहीं थे तो विभाग अब तक क्या कर रहा था। इसी तरह एक कैंटीन में बासी और बदबूदार खाद्य सामग्री मिलने से भी विभागीय निगरानी की पोल खुल गई है।
चारधाम यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालु हरिद्वार से गुजरते हैं। ऐसे में खाद्य सुरक्षा मानकों की अनदेखी सीधे जनस्वास्थ्य से जुड़ा मामला है। लोगों का कहना है कि यदि नियमित निरीक्षण होते तो ऐसी खामियां पहले ही सामने आ जातीं और कार्रवाई केवल यात्रा सीजन तक सीमित नहीं रहती।
अब विभाग कार्रवाई कर अपनी जिम्मेदारी निभाने का दावा कर रहा है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जिन प्रतिष्ठानों में आज अनियमितताएं मिल रही हैं, वे आखिर इतने समय तक विभाग की निगाहों से कैसे ओझल रहे।
बासी खाना बिकता रहा, विभाग सोता रहा! कार्रवाई के बाद उठे निगरानी पर सवाल
