हरिद्वार। हजारा ग्रंट स्थित ओशो आश्रम क्षेत्र में भूमि विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। जिले में तैनात एक महिला पुलिसकर्मी पर आश्रम परिसर में वर्षों पुराने निर्मित मकान पर कब्जा करने का प्रयास करने का आरोप लगा है। शिकायत के बाद संबंधित मकान से महिला पुलिसकर्मी के नाम की नेम प्लेट हटवा दी गई। हालांकि, पूरे मामले में फिलहाल दोनों पक्षों के दावे सामने आए हैं और महिला पुलिसकर्मी का विस्तृत पक्ष अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है।
जानकारी के अनुसार, पश्चिमी दिल्ली के रोहिणी निवासी रितु ग्रोवर ने ग्राम हजारा ग्रंट, परगना रुड़की, तहसील एवं जिला हरिद्वार स्थित खसरा संख्या 17/1 में अपने हिस्से की 450 वर्ग फुट (41.82 वर्ग मीटर) भूमि जुलाई 2026 के प्रथम सप्ताह में महिला पुलिसकर्मी के नाम पंजीकृत कराई थी। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार रजिस्ट्री में संपत्ति को खाली प्लॉट के रूप में दर्शाया गया है और उसमें किसी प्रकार के निर्माण का उल्लेख नहीं है।
दूसरी ओर, ओशो आश्रम प्रबंधन का दावा है कि संबंधित स्थान पर पिछले लगभग 15 वर्षों से आश्रम का निर्मित मकान मौजूद है। प्रबंधन का आरोप है कि हाल ही में खरीदे गए खाली प्लॉट की रजिस्ट्री के आधार पर महिला पुलिसकर्मी ने मकान पर अपने नाम की नेम प्लेट लगाकर स्वामित्व जताने का प्रयास किया। शिकायत मिलने के बाद नेम प्लेट हटा दी गई।
आश्रम प्रबंधन का यह भी कहना है कि इससे पहले भी इस संपत्ति के लेन-देन के दौरान रजिस्ट्री में भूमि को खाली प्लॉट ही दर्शाया जाता रहा है, जबकि मौके पर वर्षों पुराना निर्माण मौजूद है। उनका आरोप है कि समय-समय पर अलग-अलग लोग मकान पर पहुंचकर अपने नाम की नेम प्लेट लगा देते हैं, जिससे विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है।
आश्रम प्रबंधन ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि मौके पर लंबे समय से निर्माण मौजूद है तो उसकी स्थिति और स्वामित्व का राजस्व अभिलेखों एवं अन्य साक्ष्यों के आधार पर परीक्षण कराया जाना चाहिए।
उधर, महिला पुलिसकर्मी के पति ने बताया कि उनकी पत्नी फिलहाल अस्पताल में भर्ती हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य लाभ के बाद अगले पांच से सात दिनों में वह पूरे मामले पर अपना विस्तृत पक्ष रखेंगी।
फिलहाल मामला आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित है। किसी भी पक्ष के दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मामले की जांच और महिला पुलिसकर्मी का पक्ष सामने आने के बाद ही विवाद की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।