हरिद्वार। वाह रे जिला पंचायत! जिस सड़क को बनाने में करीब सात लाख रुपये खर्च कर दिए गए, वह सड़क बनने के महज सात दिन बाद ही जवाब दे गई। सुमन नगर रोड नंबर-3 पर जिला पंचायत निधि से करीब 130 मीटर लंबी बनाई गई इंटरलॉकिंग टाइल सड़क जगह-जगह धंसकर टूट गई है। सड़क के नीचे की परत तक उखड़ गई और इंटरलॉकिंग टाइलें हवा में लटकती नजर आ रही हैं। तस्वीरें निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि सात दिन में सड़क कैसे धंस गई? क्या निर्माण से पहले जमीन की ठीक से तैयारी की गई थी? क्या निर्धारित मानकों के अनुसार नीचे मजबूत आधार तैयार किया गया था? क्या निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच हुई थी? और सबसे अहम, भुगतान से पहले जिला पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता परखी थी या नहीं?
सड़क निर्माण स्थल पर जिला पंचायत का बोर्ड लगाया गया था। बोर्ड पर करीब 6.99 लाख रुपये की स्वीकृत धनराशि और 130 मीटर लंबाई का उल्लेख है। यदि निर्माण पूरा होने के बाद भुगतान भी हो चुका है तो मामला और गंभीर हो जाता है। इतनी बड़ी धनराशि खर्च होने के बाद सड़क का सप्ताहभर भी नहीं टिकना सरकारी निर्माण की निगरानी व्यवस्था पर सीधा सवाल है।
सड़क धंसने के बाद ठेकेदार की ओर से इसे प्राकृतिक आपदा का परिणाम बताया जा रहा है। लेकिन सवाल यह है कि क्या प्राकृतिक आपदा के नाम पर निर्माण की खामियों की जिम्मेदारी से बचा जा सकता है? निष्पक्ष तकनीकी जांच से ही स्थिति साफ हो सकती है।
क्षेत्रवासियों ने सड़क की तकनीकी जांच, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच, भुगतान प्रक्रिया की जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
सवाल सीधा है। सात लाख की सड़क सात दिन में धंस गई तो आखिर गुणवत्ता की जांच किसने की और भुगतान किस आधार पर किया गया?
वाह रे जिला पंचायत! सात दिन में ही धंस गई सात लाख की सड़क, विकास के नाम पर सरकारी धन की खुली बर्बादी?