हरिद्वार। ज्वालापुर के जट्टवाड़ा पुल स्थित ऊर्जा निगम के बिजलीघर की चारदीवारी पहली तेज बारिश का दबाव भी नहीं झेल सकी और गुरुवार सुबह भरभराकर जमीन पर आ गिरी। दीवार गिरने के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं और ऊर्जा निगम के एक चहेते ठेकेदार की कार्यशैली फिर सवालों के घेरे में आ गई है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता मानकों की अनदेखी की गई। उनका कहना है कि दीवार को मजबूती देने के लिए आवश्यक आरसीसी कॉलम तक नहीं बनाए गए, जिसके चलते मामूली बारिश ने ही निर्माण की पोल खोल दी। गनीमत रही कि हादसे के वक्त मौके पर कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था, वरना बड़ा हादसा हो सकता था।
लोगों का कहना है कि संबंधित ठेकेदार के कई निर्माण कार्य पहले भी सवालों के घेरे में रहे हैं और विभिन्न स्थानों पर खामियां सामने आने के बावजूद उस पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई। यही वजह है कि एक बार फिर निगम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
घटना के बाद क्षेत्रवासियों ने दोषी ठेकेदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय जांच और भुगतान पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि सरकारी धन से होने वाले निर्माण कार्यों में लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।
इस संबंध में ऊर्जा निगम की उपखंड अधिकारी शिल्पी सैनी ने बताया कि गिरी हुई चारदीवारी का पुनर्निर्माण कराया जाएगा। साथ ही दीवार गिरने के कारणों की जांच भी कराई जाएगी। यदि जांच में निर्माण में लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।