हरिद्वार (प्रवीण कुमार) सरकार को प्रतिवर्ष करीब 12 करोड़ रुपये का राजस्व देने वाला अंग्रेजी शराब का ठेका इन दिनों विवादों में है। आरोप है कि आबकारी विभाग ने नियम-कायदों को दरकिनार कर ठेके को संचालित होने की छूट दे रखी है। मामला शिवालिक नगर के नाम पर संचालित उस शराब की दुकान से जुड़ा है, जो वर्तमान में बैरियर नंबर-6 क्षेत्र में संचालित हो रही है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि ठेके के समीप प्राचीन हनुमान मंदिर, गोगामेड़ी मंदिर और एक निजी विद्यालय स्थित है। इसके बावजूद मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर की गई शिकायतों को गंभीरता से लेने के बजाय बंद कर दिया गया। आरोप है कि आबकारी विभाग ने अपनी रिपोर्ट में मंदिर के पंजीकृत न होने का हवाला दिया, जबकि सवाल यह उठ रहा है कि जिले में कितने धार्मिक स्थल औपचारिक रूप से पंजीकृत हैं।
विवाद तब और गहरा गया जब विभागीय रिपोर्ट में यह उल्लेख किया गया कि संबंधित ठेका सरकार को हर वर्ष लगभग 12 करोड़ रुपये का राजस्व देता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि राजस्व के नाम पर नियमों और जनभावनाओं की अनदेखी की जा रही है। उनका कहना है कि यदि कानून के विपरीत किसी स्थान पर शराब की दुकान संचालित हो रही है तो केवल अधिक राजस्व मिलने का तर्क उसे वैध नहीं बना सकता।
अब क्षेत्रवासियों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि आखिर किन नियमों और आधारों पर विवादित ठेके को संचालित करने की अनुमति दी जा रही है। साथ ही मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों का पुनः परीक्षण कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कानून बड़ा है या फिर 12 करोड़ रुपये का राजस्व।
