हरिद्वार (प्रवीण कुमार) एक ओर जिलाधिकारी पूरे जिले को स्वच्छ बनाने के लिए दिन-रात जुटे हुए हैं, वहीं सिडकुल के जिम्मेदार अधिकारी उनके अभियान को खुलेआम पलीता लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। जिला मुख्यालय से कुछ ही दूरी पर स्थित सिडकुल औद्योगिक क्षेत्र में गंदगी के जगह जगह ढ़ेर लगे हैं और राजा बिस्कुट कंपनी के पीछे अवैध रूप से डंप किए गए कूड़े ने पूरे क्षेत्र को बदबू का अड्डा बना दिया है। हालात इतने खराब हैं कि फैक्ट्री कर्मचारियों और राहगीरों को मुंह ढककर गुजरना पड़ रहा है।
हैरानी की बात यह है कि करीब चार माह पहले जिलाधिकारी के आदेश पर हजारों रुपये खर्च कर तीन-तीन जेसीबी मशीनों से यहां सफाई कराई गई थी। सिडकुल प्रशासन ने सीमा पर जालियां लगाकर हदबंदी का दावा भी किया था, लेकिन इसके बाद अधिकारियों ने कभी पलटकर देखने की जहमत तक नहीं उठाई। नतीजा यह है कि आज वही स्थान फिर कूड़े के ढेरों से पट चुका है।
जब जिले भर की पंचायतों से स्वच्छता की दैनिक रिपोर्ट मांगी जा रही हो, कंट्रोल रूम बनाया गया हो, उपजिलाधिकारियों और तहसीलदारों को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया हो तथा लापरवाही पर छह एडीओ पंचायतों के वेतन तक रोक दिए गए हों, तब सिडकुल में फैली यह गंदगी जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जिलाधिकारी के आदेशों का यही हाल रहा तो स्वच्छता अभियान केवल कागजों तक सिमटकर रह जाएगा। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होती है या फिर कूड़े के इन ढेरों के बीच स्वच्छता अभियान दम तोड़ता रहेगा।
