हरिद्वार (प्रवीण कुमार) भारतीय शिक्षा बोर्ड (बीएसबी) की तरफ से पतंजलि फेज-2 स्थित पीआरआई ऑडिटोरियम में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय संवाद सत्र का समापन हुआ। कार्यक्रम में देश के 12 राज्यों से आए शिक्षाविदों, विद्यालय प्रतिनिधियों और शिक्षा विशेषज्ञों ने भाग लेकर भारतीय शिक्षा व्यवस्था के भविष्य को लेकर व्यापक चर्चा की।
बीएसबी के चेयरमैन एवं सेवानिवृत्त आईएएस डॉ. एनपी सिंह ने कहा कि भारतीय शिक्षा बोर्ड भारतीय ज्ञान परंपरा, नैतिक मूल्यों, कौशल विकास और आधुनिक विज्ञान को एकीकृत कर शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति के अनुरूप भारत-केंद्रित शिक्षा प्रणाली विकसित करना समय की आवश्यकता है।
तीन दिवसीय सत्र का उद्देश्य संबद्ध विद्यालयों से जुड़े शैक्षणिक एवं संस्थागत विषयों पर संवाद, पारदर्शिता और सहयोगात्मक समाधान सुनिश्चित करना था। इस दौरान पाठ्यक्रम एवं पाठ्यपुस्तकों, मूल्यांकन प्रणाली, संबद्धता प्रक्रियाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा ओपन हाउस सत्रों में विद्यालयों की जिज्ञासाओं और सुझावों पर विस्तार से चर्चा हुई।
प्रतिभागियों ने भारतीय शिक्षा बोर्ड की कार्यप्रणाली और भारतीय मूल्यों पर आधारित शिक्षा मॉडल की सराहना करते हुए इसे शिक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, असम, झारखंड, राजस्थान, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर, ओडिशा और हरियाणा सहित विभिन्न राज्यों के शिक्षाविदों ने भागीदारी की।
इस अवसर पर प्रशिक्षण एवं गुरुकुल शिक्षा सलाहकार वंदना पांडे, शैक्षणिक निदेशक लक्ष्मी प्रमाणिक, परीक्षा नियंत्रक राजबीर सिंह तथा संबद्धता सलाहकार विवेक सहित बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
भारतीय शिक्षा में बदलाव का खाका तैयार, राष्ट्रीय संवाद सत्र में बना महा-रोडमैप
