हरिद्वार(गौरव कुमार)। हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण अवैध निर्माणों के खिलाफ लगातार सख्ती का दावा कर रहा है, लेकिन मायापुर सेक्टर में प्राधिकरण के नोटिस का असर धरातल पर दिखाई नहीं दे रहा है। मायापुर क्षेत्र में शंकर आश्रम स्थित कल्याण ज्वेलर्स के पास और गोविंदपुरी में गंगा किनारे गुरुद्वारे के सामने निर्माण कार्य लगातार जारी रहने से प्राधिकरण की कार्रवाई और क्षेत्रीय निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, मायापुर क्षेत्र में कल्याण ज्वेलर्स के पास और गोविंदपुरी में गंगा किनारे गुरुद्वारे के सामने हो रहे निर्माण को लेकर पूर्व में संबंधित अधिकारियों की ओर से कई नोटिस जारी किए जा चुके हैं। इसके बावजूद निर्माण कार्य रुकने के बजाय लगातार आगे बढ़ रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि नोटिस जारी करने के बाद संबंधित अधिकारी मौके पर निर्माण की निगरानी क्यों नहीं कर रहे हैं। यदि निरीक्षण किया जा रहा है तो निर्माण कार्य जारी रहने के बावजूद अब तक प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? प्राधिकरण की ओर से अवैध निर्माण के खिलाफ नोटिस जारी करना प्रारंभिक कार्रवाई मानी जाती है। इसके बाद निर्माणकर्ता के जवाब और मौके की स्थिति के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाती है। लेकिन यहां स्थिति यह है कि नोटिस के बावजूद निर्माण गतिविधियां जारी रहने की बात सामने आ रही है। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या नोटिस महज खानापूर्ति बनकर रह गए हैं? निर्माण कार्य इसी तरह जारी रहने से प्राधिकरण को संभावित शुल्क और अन्य राजस्व की भी हानि होने की आशंका है। कुंभ-2027 की तैयारियों को लेकर एचआरडीए के उच्चाधिकारी व्यवस्थाओं में व्यस्त हैं। वहीं दूसरी ओर शहर के अलग-अलग हिस्सों में निर्माण कार्य लगातार आगे बढ़ रहे हैं। ऐसे में क्षेत्रीय जेई और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी को लेकर भी सवाल उठना लाजिमी है। मायापुर क्षेत्र में कल्याण ज्वेलर्स के पास निर्माण और गोविंदपुरी में गंगा किनारे गुरुद्वारे के सामने निर्माण मामलों में यदि पहले ही नोटिस जारी किए जा चुके हैं तो उसके बाद मौके की निगरानी किस स्तर पर हुई? निर्माण नहीं रुका तो जिम्मेदारी किसकी है और सीलिंग की कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है? *सवालों के घेरे में निगरानी तंत्र*अवैध निर्माण पर सिर्फ नोटिस जारी करना पर्याप्त नहीं है। नोटिस के बाद निर्माण रोकना और नियमों का उल्लंघन जारी रहने पर समयबद्ध कार्रवाई करना भी प्राधिकरण की जिम्मेदारी है। ऐसे में इन दोनों स्थानों पर लगातार निर्माण कार्य जारी रहने से एचआरडीए के क्षेत्रीय निगरानी तंत्र की सक्रियता पर सवाल उठ रहे हैं। साथ ही निर्माण पर समय रहते कार्रवाई नहीं होने से संभावित राजस्व नुकसान का पहलू भी महत्वपूर्ण है। अब देखना होगा कि प्राधिकरण इन दोनों निर्माणों का मौके पर निरीक्षण कर आगे क्या कार्रवाई करता है और नोटिस के बावजूद निर्माण जारी रहने के मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होती है या नहीं।



कागजों में नोटिस, जमीन पर अवैध निर्माण; मायापुर सेक्टर में एचआरडीए की कार्रवाई बेअसर