हरिद्वार, (गौरव कुमार)चमोली जिले के नंदानगर क्षेत्र की युवा लोकगायिका नीतू उर्फ निहारिका सती उत्तराखंड की पारंपरिक जागर और मांगल परंपरा को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। पुरुष प्रधान मानी जाने वाली जागर विधा में अपनी अलग पहचान बनाकर उन्होंने लोक संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का अभियान शुरू किया है।
निहारिका सती पिछले दस वर्षों से जागर और मांगल गीतों के माध्यम से उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखने का कार्य कर रही हैं। उनकी प्रेरणा उनकी मां और दादी से मिली, जिन्होंने वर्षों तक मांगल गीतों की परंपरा को आगे बढ़ाया। बचपन से लोकगीतों के वातावरण में पली-बढ़ी निहारिका ने इसी विरासत को अपनी पहचान बना लिया।
उन्होंने बताया कि शुरुआत में लोगों ने उनके प्रयासों को गंभीरता से नहीं लिया और कई बार उपहास का भी सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। आज वे उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों, धार्मिक आयोजनों और विश्वविद्यालयों के मंचों पर अपनी प्रस्तुतियां दे रही हैं।
निहारिका का मानना है कि जागर केवल लोकगायन नहीं, बल्कि देवी-देवताओं और लोक परंपराओं से जुड़ी आस्था की आवाज है। वहीं मांगल गीत उत्तराखंड की सामाजिक और धार्मिक परंपराओं का अभिन्न हिस्सा हैं। उनका कहना है कि यदि इन विधाओं को संरक्षित नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ियां अपनी सांस्कृतिक जड़ों से दूर हो जाएंगी।
उन्होंने युवाओं से लोक संस्कृति से जुड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि डिजिटल माध्यमों और सोशल मीडिया के जरिए जागर और मांगल जैसी परंपराओं को दुनिया भर तक पहुंचाया जा सकता है। निहारिका सती का उद्देश्य देवभूमि की सांस्कृतिक धरोहर को नई पीढ़ी तक पहुंचाकर उसे जीवंत बनाए रखना है।
