HINDUSTAN NEWS TODAY, हरिद्वार। उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू होने का एक वर्ष पूरा हो गया है। राज्य मंत्री सुनील सैनी ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड ने देश का पहला राज्य बनकर इतिहास रचा है। यह उपलब्धि भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गई है।
समान नागरिक संहिता का अर्थ है कि विवाह, तलाक, गोद लेना और संपत्ति उत्तराधिकार जैसे व्यक्तिगत मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून लागू हो, चाहे वे किसी भी धर्म, जाति या समुदाय के हों। इस कानून से बहुविवाह और एकतरफा तलाक पर रोक लगी है, जो महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। बेटी और बेटे को संपत्ति में समान अधिकार मिला है, जिससे लैंगिक समानता को मजबूती मिली। विवाह का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे विवाह का वैधानिक प्रमाण-पत्र सुनिश्चित होता है।
यह कानून संविधान के अनुच्छेद 44 के निर्देश को धरातल पर उतारने की सशक्त पहल है। उत्तराखंड सरकार ने राजनीतिक इच्छाशक्ति और जनसमर्थन से दशकों पुराने संवैधानिक संकल्प को साकार किया। इससे सामाजिक न्याय, लैंगिक समानता और सभी नागरिकों के समान अधिकार मजबूत हुए हैं।
राज्यवासियों ने इस पहल का स्वागत किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रयासों से उत्तराखंड पूरे देश के लिए उदाहरण बन गया है। आज प्रदेश भर में समान नागरिक संहिता दिवस मनाया जा रहा है। राज्य मंत्री सुनील सैनी ने सभी राज्यवासियों को बधाई दी और मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। यह कदम सामाजिक समरसता और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने वाला साबित हुआ है।