हरिद्वार(गौरव कुमार) धर्मनगरी में श्रद्धालुओं और यात्रियों की सुविधा के लिए बनाए गए सुलभ शौचालयों की व्यवस्था सवालों के घेरे में है। शहर के विभिन्न क्षेत्रों में संचालित कई सुलभ शौचालयों में गंदगी, दुर्गंध और अव्यवस्थाओं का आलम है। इसके बावजूद लोगों से सुविधा शुल्क वसूले जाने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। इससे पूर्व एक बार जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने निरीक्षण के दौरान सख्त चेतावनी दी थी। अब फिर से शौचालय संचालक फिर से मनमानी पर उतर आए हैं। स्थानीय लोगों और बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं से कई स्थानों पर लघुशंका के लिए भी 10 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। वहीं, शौचालयों के भीतर सफाई व्यवस्था बेहद खराब है। कई जगहों पर नियमित सफाई नहीं होने से गंदगी जमा है और दुर्गंध के कारण लोगों का वहां कुछ देर खड़ा रहना भी मुश्किल हो जाता है। लोगों का कहना है कि हरिद्वार देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में सार्वजनिक सुविधाओं की बेहतर व्यवस्था होना आवश्यक है। लेकिन कई सुलभ शौचालयों की स्थिति इसके विपरीत दिखाई देती है। सफाई के अभाव में लोग इनका उपयोग करने से भी कतराने लगे हैं। लोगों का कहना है कि यदि लोगों से शुल्क लिया जा रहा है तो उसके अनुरूप साफ-सफाई और मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए आरोप है कि संबंधित एजेंसियों द्वारा नियमित निगरानी नहीं की जा रही, जिसके चलते व्यवस्थाएं लगातार बिगड़ती जा रही हैं। नगर निगम और संबंधित विभागों से सुलभ शौचालयों की नियमित सफाई सुनिश्चित कराने, शुल्क वसूली की व्यवस्था की जांच करने और यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग उठी है।
सुलभ शौचालय बने परेशानी का सबब, श्रद्धालुओं से वसूली जारी और सफाई व्यवस्था बदहाल
