हरिद्वार (गौरव कुमार) पत्रकार संगठन की अंदरूनी राजनीति उस समय गरमा गई जब वरिष्ठ पत्रकार नरेश गुप्ता ने एनयूजेआई (NUJ-I) के प्रदेश अध्यक्ष सुनील दत्त पांडे द्वारा किए गए अपने कथित निष्कासन को सिरे से खारिज कर दिया। इस पूरे घटनाक्रम ने संगठन के भीतर उठापटक और आरोप-प्रत्यारोप का नया दौर शुरू कर दिया है।
नरेश गुप्ता ने कहा कि उन्हें कुछ समाचार पोर्टलों के जरिए यह जानकारी मिली कि संगठन विरोधी गतिविधियों के आरोप में उन्हें आजीवन निष्कासित कर दिया गया है। उन्होंने इस कार्रवाई को न केवल अनुचित बल्कि पूरी तरह से निरर्थक बताया।
उन्होंने दावा किया कि वह इससे पहले ही दोपहर 1:35 बजे व्हाट्सएप के माध्यम से अपना इस्तीफा प्रदेश अध्यक्ष को भेज चुके थे। इतना ही नहीं, उन्होंने अपना इस्तीफा कई पत्रकारों के समूहों में भी साझा कर दिया था। ऐसे में उनका सवाल है कि जब वह स्वयं संगठन छोड़ चुके थे, तो फिर निष्कासन की कार्रवाई किस आधार पर की गई।
नरेश गुप्ता ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “इस्तीफे के बाद निष्कासन का कोई औचित्य नहीं बनता। यह पूरी तरह से मेरी छवि धूमिल करने की कोशिश है।” उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ पोर्टलों में जानबूझकर खबर प्रकाशित कराई गई, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया जा सके।
इस मामले को लेकर उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर भी अपना पक्ष सार्वजनिक करते हुए निष्कासन को खारिज कर दिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह मामला अब यहीं नहीं रुकेगा।
वरिष्ठ पत्रकार ने प्रदेश अध्यक्ष सुनील दत्त पांडे को सीधी चेतावनी देते हुए कहा कि वह इस पूरे प्रकरण को कानूनी रूप देंगे। साथ ही उन्होंने संकेत दिए कि संगठन से जुड़े कुछ लोगों की गतिविधियों को भी सार्वजनिक किया जाएगा, जिससे पूरे शहर और प्रदेश की जनता सच्चाई से अवगत हो सके।
निष्कासित पर संग्राम : “पहले इस्तीफा दे चुका, फिर निष्कासन कैसा?” संगठन पर उठाए सवाल
