हरिद्वार (गौरव कुमार) हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर प्रेस क्लब हरिद्वार की ओर से द्विशताब्दी समारोह एवं संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी ने की, जबकि मुख्य अतिथि पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले पत्रकारों को सम्मानित किया गया। वरिष्ठ पत्रकार गोपाल रावत को स्वर्गीय मधुकांत प्रेमी स्मृति पुरस्कार तथा राहुल वर्मा को स्वर्गीय पीएस चौहान स्मृति पुरस्कार प्रदान किया गया। साथ ही पत्रकारिता की पढ़ाई में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को गोल्ड मेडल देकर सम्मानित किया गया।
मुख्य वक्ता प्रोफेसर गोविंद सिंह ने हिंदी पत्रकारिता के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वर्ष 1826 में ‘उदंत मार्तंड’ से इसकी शुरुआत हुई और 1857 की क्रांति तथा स्वतंत्रता संग्राम में हिंदी पत्रकारिता ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में अभिव्यक्ति के नए माध्यम विकसित हुए हैं, लेकिन प्रिंट मीडिया की विश्वसनीयता आज भी बरकरार है।
मुख्य अतिथि भगत सिंह कोश्यारी ने कहा कि एआई के दौर में भी प्रिंट मीडिया का महत्व कम नहीं हुआ है और भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। वहीं स्वामी कैलाशानंद गिरी ने कहा कि पत्रकारिता समाज को आईना दिखाने का कार्य करती है और सत्य को निर्भीकता से प्रस्तुत करना ही इसका धर्म है।
कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार दीपक नौटियाल ने किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता और गणमान्य अतिथि मौजूद रहे।
