हरिद्वार। औद्योगिक क्षेत्र सिडकुल इन दिनों जमीन आवंटन और प्रबंधन से जुड़े विवादों को लेकर सुर्खियों में है। क्षेत्रीय प्रबंधक (आरएम) पर लगे आरोपों के बीच कई मामलों की जांच चल रही है, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई न होने से सवाल उठने लगे हैं।
सूत्रों के अनुसार, जिस पद पर वर्तमान में प्रभारी आरएम कार्यरत हैं, वह मूलतः पीसीएस स्तर का पद है, जबकि इस जिम्मेदारी पर एक पीआरओ को नियुक्त किया गया है। सीमित अनुभव के चलते औद्योगिक विकास कार्यों में बाधाएं आने की बात भी सामने आ रही है। हाल ही में बहादराबाद औद्योगिक क्षेत्र की एक फैक्ट्री को कथित तौर पर नियमविरुद्ध ट्रांसफर करने का मामला सामने आया है, जिससे सिडकुल को लगभग 1.20 करोड़ रुपये के नुकसान की आशंका जताई गई है।
इसी तरह सेक्टर-6ए में सरकारी ट्यूबवेल की करोड़ों रुपये मूल्य की भूमि आज तक कब्जामुक्त नहीं कराई जा सकी है। आरोप है कि पूर्व में मौखिक निर्देशों के आधार पर कब्जा कराया गया था। हालांकि मामला उच्च स्तर तक पहुंचने पर अतिक्रमण हटाया गया, लेकिन जमीन अब भी पूरी तरह सिडकुल के नियंत्रण में नहीं आ पाई है।
एक अन्य मामले में एक फूड कंपनी के डि-मर्जर को लेकर भी नियमों के उल्लंघन के आरोप लगे, जिस पर न्यायालय में याचिका दायर की गई। लेकिन इस प्रकरण की जांच की स्थिति स्पष्ट नहीं है।
इन सभी मामलों में जांच तो शुरू हुई, लेकिन कार्रवाई नोटिस जारी करने तक सीमित रह गई। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या प्रशासनिक या राजनीतिक दबाव के चलते सख्त कदम उठाने में देरी हो रही है।
