हरिद्वार(गौरव कुमार) रानीपुर विधानसभा की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या मनोज धनगर को राजनीतिक सडयंत्र के तहत कांग्रेस पार्टी में जाने से रोका गया है। हालांकि मनोज धनगर ने वर्ष 2007 से यूथ कांग्रेस से अपना सफर तय किया था। 16 वर्षों का यह सफर बेहतर होने के बाद कुछ समय के लिए छूट गया। लेकिन अब दोबारा फिर धनगर घर वापसी की तैयारी में थे। 300 से ज्यादा वाहनों का काफिला, एक हजार से ज्यादा समर्थकों ने पूरी तैयारी कर ली थी। लेकिन इस पर ब्रेक लग गया। यहां सवाल खड़े होने लाजमी है कि क्या सच मे ही मनोज धनगर वर्तमान भाजपा विधायक आदेश चौहान के सामने प्रत्याशी बनकर आने वाले थे। क्या रानीपुर विधानसभा में भाजपा को टक्कर केवल धनगर ही दे सकते हैं। खैर यह बात अभी समय के आगोश में छिपी हुई है। बता दें कि लंबे समय से रानीपुर विधानसभा समेत जिले की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहे मनोज धनगर 23 फरवरी को सैकड़ों समर्थकों के साथ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सदस्यता लेने वाले थे। देहरादून स्थित प्रदेश कार्यालय में कार्यक्रम की तैयारियां भी लगभग पूरी बताई जा रही थीं, लेकिन ऐन वक्त पर सदस्यता कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया।
सूत्रों के अनुसार, जिला स्तर के कुछ पदाधिकारियों को धनगर की सक्रियता और शीर्ष नेतृत्व से उनके सीधे संपर्क की कोशिश रास नहीं आई। माना जा रहा है कि अंदरखाने हुए विरोध के चलते कार्यक्रम को टालने का निर्णय लिया गया। खास बात यह रही कि कार्यक्रम स्थगित होने की जानकारी स्वयं मनोज धनगर को सोशल मीडिया के माध्यम से देनी पड़ी, जिसके बाद समर्थकों में निराशा देखी गई।
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि रानीपुर सीट से दावेदारी की संभावनाओं ने भी इस घटनाक्रम को प्रभावित किया। स्थानीय स्तर पर कुछ नेता स्वयं को संभावित प्रत्याशी मानकर चल रहे हैं, ऐसे में धनगर की एंट्री से समीकरण बदल सकते थे। फिलहाल धनगर समर्थकों की बैठकें जारी हैं और आगे की रणनीति पर मंथन हो रहा है।
अब नजर इस बात पर टिकी है कि क्या कांग्रेस नेतृत्व इस गतिरोध को सुलझाकर धनगर की वापसी सुनिश्चित करेगा या फिर वे समर्थकों के साथ किसी अन्य राजनीतिक विकल्प की ओर रुख करेंगे।