HINDUSTAN NEWS TODAY, हरिद्वार। उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की नहर सफाई से निकली लाखों रुपये की सरकारी मिट्टी को देर रात जेसीबी और डंपरों से चोरी कर लिया गया। हैरानी की बात यह है कि चोरी पुलिस चौकी सुमन नगर के ठीक बगल में हुई और मिट्टी उसी इलाके में डाली गई, फिर भी कोई कार्रवाई तत्काल नहीं हुई। ठेकेदार और जिसके यहां मिट्टी डाली गई, दोनों एक ही बिरादरी व एक ही जिले के आसपास के बताए जा रहे हैं। यह सांठगांठ की खुली मिसाल है।
सबसे बड़ा सवाल सिंचाई विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों पर उठता है। विभाग को पूरी जानकारी होने के बावजूद ठेकेदार को बचाने की कोशिश की जा रही है। अधिकारी बेशर्मी से जिम्मेदारी पुलिस पर डाल रहे हैं कि “चोरी रोकना पुलिस का काम था”। क्या विभाग का काम सिर्फ मिट्टी निकालना और उसे लावारिस छोड़ देना है? नियम स्पष्ट है कि नहर की मिट्टी को नीलाम करके ही हटाया जा सकता है, ताकि राजस्व जिलाधिकारी को मिले। लेकिन यहां बिना नीलामी के रातोंरात मिट्टी गायब कर दी गई और विभाग मूकदर्शक बना रहा।
सलेमपुर रेगुलेटर से धनोरी तक गंग नहर की करीब आठ किलोमीटर सफाई का काम चल रहा है। इतने बड़े प्रोजेक्ट में मिट्टी की सुरक्षा और नीलामी की जिम्मेदारी सीधे सिंचाई विभाग की है। फिर भी चोरी हो गई और अधिकारी अब खनन विभाग, एसडीएम, डीएम व पुलिस को चिट्ठी लिखने की औपचारिकता निभा रहे हैं। यह सरासर मिलीभगत और कर्तव्य से भागने का प्रमाण है।
सिंचाई विभाग की यह कार्यशैली न सिर्फ सरकारी खजाने को चूना लगा रही है, बल्कि भ्रष्टाचार को खुला न्योता भी दे रही है। जब तक अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, ऐसी चोरियां रुकने वाली नहीं हैं।