हरिद्वार। भारतीय जनता पार्टी अनुसूचित मोर्चा, उत्तराखंड के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष समीर आर्य ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा जारी उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी विनियम, 2026 के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया है।
ये विनियम 13 जनवरी 2026 को अधिसूचित किए गए हैं, जो 2012 के भेदभाव-रोधी नियमों का अधिक प्रभावी और अद्यतन संस्करण हैं। इनका मुख्य लक्ष्य उच्च शिक्षा में जाति, धर्म, लिंग, दिव्यांगता, सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि आदि आधार पर किसी भी प्रकार के भेदभाव को समाप्त करना, सभी छात्रों को समान अवसर प्रदान करना तथा समावेशी विकास को गति देना है।
प्रमुख प्रावधानों में हर उच्च शिक्षा संस्थान में समान अवसर केंद्र की स्थापना, समानता समिति का गठन, 24 घंटे हेल्पलाइन, समयबद्ध शिकायत निवारण, नियमित अनुपालन रिपोर्टिंग तथा नियमों का पालन न करने पर सख्त कार्रवाई शामिल है। ये नियम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के समानता, समावेशन और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों पर आधारित हैं तथा एससी, एसटी, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस और दिव्यांग छात्रों को मजबूत सुरक्षा प्रदान करते हैं।
समीर आर्य ने इसे संविधान के समानता (अनुच्छेद 14) एवं सामाजिक न्याय के मूल्यों को व्यावहारिक रूप देने वाला ऐतिहासिक एवं दूरदर्शी कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह विनियम सभी वर्गों के छात्रों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा तक निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करेगा, प्रतिभा को पृष्ठभूमि के कारण दबने नहीं देगा तथा एक समतामूलक, सशक्त और ज्ञान-आधारित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा उच्च शिक्षा को अधिक समावेशी बनाने की इस पहल की सराहना करते हुए समीर आर्य ने कहा कि यह कदम राष्ट्रहित में है तथा युवा पीढ़ी को नई ऊर्जा प्रदान करेगा।
यूसीसी : सामाजिक न्याय के मूल्यों को व्यावहारिक रूप देने वाला ऐतिहासिक एवं दूरदर्शी कदम, समीर आर्य