नई शिक्षा नीति से संस्कृत को मिलेगा नया जीवन, संस्कृत छात्रों के लिए छात्रवृत्ति और पुरस्कार जारी, उच्च स्तरीय संस्कृत आयोग गठित होगा,

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HINDUSTAN NEWS TODAY,

हरिद्वार। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए संस्कृत भाषा के उत्थान और संवर्धन के लिए दो महत्वपूर्ण घोषणाएँ कीं। पहली घोषणा संस्कृत भाषा के विकास एवं संरक्षण को एक उच्च स्तरीय आयोग के गठन की है, जबकि दूसरी घोषणा राज्य के प्रत्येक जनपद में एक-एक आदर्श संस्कृत ग्राम स्थापित करने की है।

सम्मेलन का विषय “भारतीय ज्ञान परंपरा: वैश्विक ज्ञान के विकास में संस्कृत का योगदान” रखा गया है। इसमें भारत सहित अमेरिका, जर्मनी, रूस, जापान, थाईलैंड समेत कई देशों के संस्कृत विद्वान, शोधार्थी और शिक्षाविद् भाग ले रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि संस्कृत केवल धार्मिक अनुष्ठानों की भाषा नहीं है, बल्कि यह विश्व की प्राचीनतम और सबसे वैज्ञानिक भाषा है। वेद, उपनिषद, पुराण, आयुर्वेद, योग, गणित, खगोलशास्त्र, दर्शनशास्त्र और नीतिशास्त्र जैसे सभी प्रमुख ज्ञान-विज्ञान के ग्रंथ मूलतः संस्कृत में ही रचे गए हैं। उन्होंने स्मरण दिलाया कि 18वीं-19वीं शताब्दी में यूरोपीय विद्वानों ने संस्कृत की खोज कर इसे “भाषाओं की जननी” कहा था।

उत्तराखंड को संस्कृत का प्राचीन केंद्र बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि की यह पावन भूमि ऋषियों-मुनियों की तपस्थली रही है। राज्य में संस्कृत को द्वितीय राजभाषा का दर्जा पहले ही दिया जा चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा नई शिक्षा नीति-2020 में भारतीय भाषाओं और विशेष रूप से संस्कृत को बढ़ावा देने के प्रावधान किए गए हैं, जिसका उत्तराखंड पूरी तरह अनुपालन कर रहा है।

राज्य सरकार द्वारा संस्कृत शिक्षा को प्रोत्साहन देने के लिए कई योजनाएँ संचालित हैं:

  • गार्गी संस्कृत बालिका छात्रवृत्ति योजना के तहत छात्राओं को प्रतिमाह 251 रुपये
  • डॉ. भीमराव अम्बेडकर SC/ST छात्रवृत्ति योजना के तहत अनुसूचित जाति-जनजाति के संस्कृत छात्रों को समान सहायता
  • संस्कृत छात्र प्रतिभा सम्मान योजना के अंतर्गत हाईस्कूल व इंटरमीडिएट में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को 5100, 4100 व 3100 रुपये के पुरस्कार
  • उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय और श्री रघुनाथकीर्ति केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के स्नातक-स्नातकोत्तर छात्रों को भी पुरस्कार

उत्तराखंड संस्कृत अकादमी द्वारा नियमित रूप से अखिल भारतीय शोध सम्मेलन, वेद सम्मेलन, ज्योतिष सम्मेलन और शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशालाएँ आयोजित की जा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्नाटक के मट्टूरु ग्राम की तरह उत्तराखंड में भी ऐसे गाँव विकसित किए जाएँगे जहाँ संस्कृत दैनिक जीवन की भाषा बने। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में संस्कृत पुनः जन-जन की भाषा के रूप में स्थापित होगी।

कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, विधायक आदेश चौहान, प्रदीप बत्रा, विदेश मंत्रालय की सचिव मीना मल्होत्रा, सचिव संस्कृत शिक्षा दीपक गैरोला, कुलपति दिनेश चंद्र शास्त्री, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित सहित सैकड़ों विद्वान उपस्थित रहे।

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