हरिद्वार (गौरव कुमार) पतंजलि योगपीठ ने एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जिसे कभी विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ‘असंभव’ मानकर अधूरा छोड़ दिया था। अब डिजिटल युग में Google जैसी बड़ी कंपनी भी इस कार्य में रुचि दिखा रही है और अपने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए पतंजलि के एविडेंस-बेस्ड डेटा की मांग कर रही है।
दरअसल, वर्ष 1999 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने औषधीय पौधों और पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान के वैश्विक संकलन की परियोजना शुरू की थी, लेकिन 2010 में इसे जटिल बताते हुए रोक दिया गया। इसके विपरीत पतंजलि योगपीठ ने 2003-04 से इस दिशा में कार्य शुरू कर दिया और करीब दो दशकों की मेहनत के बाद 2022 में इसे पूर्ण रूप दिया।
‘विश्व भेषज संहिता’ नामक इस महाग्रंथ के 109 खंड तैयार किए गए हैं, जिनमें लगभग 1.25 लाख पृष्ठ शामिल हैं। इसमें 50 हजार औषधीय पौधों, 2000 से अधिक जनजातियों के पारंपरिक ज्ञान, 964 हीलिंग प्रैक्टिसेस और कई चिकित्सा पद्धतियों का विस्तृत विवरण दिया गया है।
देहरादून में आयोजित दून बुक फेस्टिवल में आचार्य बालकृष्ण ने इस उपलब्धि का खुलासा करते हुए इसे भारतीय ज्ञान परंपरा की बड़ी जीत बताया।
