आवासीय नक्शों की आड़ में व्यावसायिक निर्माण, एचआरडीए कागजी कार्रवाई तक सीमित

Listen to this article

हरिद्वार। हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (एचआरडीए) भले ही अवैध निर्माण और अवैध कॉलोनियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई के दावे कर रहा हो, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। शहर की कई आवासीय कॉलोनियों में नियमों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से व्यावसायिक और बहुमंजिला निर्माण कार्य जारी है, जबकि प्राधिकरण की ओर से की जा रही कार्रवाई महज नोटिस तक सिमटकर रह गई है। शहर की न्यू हरिद्वार कॉलोनी और विवेक विहार कॉलोनी में हालात सबसे ज्यादा चिंताजनक नजर आ रहे हैं। यहां बिल्डर आवासीय श्रेणी में नक्शा पास कराकर मौके पर फ्लैट्स, दुकानों और व्यावसायिक उपयोग के लिए बहुमंजिला भवन खड़े कर रहे हैं। नियमों के मुताबिक जिन क्षेत्रों में केवल आवासीय निर्माण की अनुमति है, वहां खुलेआम व्यवसायिक गतिविधियां संचालित करने की तैयारी की जा रही है। प्राधिकरण की ओर से इन निर्माणकर्ताओं को नोटिस जारी किए जाने की पुष्टि भी की गई है, लेकिन इसके बावजूद निर्माण कार्य बेरोकटोक जारी है। सवाल उठता है कि यदि समय रहते कार्रवाई होती तो आज यह स्थिति पैदा ही नहीं होती। सवाल यह है कि नोटिस जारी करने के बाद क्या प्राधिकरण के अधिकारी मौके पर निरीक्षण करने नहीं पहुंच रहे, या फिर जानबूझकर आंखें मूंद ली गई हैं। आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक निर्माण बढ़ने से ट्रैफिक, पार्किंग, जल निकासी और सीवर जैसी मूलभूत समस्याएं गंभीर होती जा रही हैं। कॉलोनियों की शांत और सुरक्षित आवासीय पहचान धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है, लेकिन जिम्मेदार विभाग मूकदर्शक बना हुआ है। नियोजन नियमों के खुले उल्लंघन से न केवल शहर की सुनियोजित विकास व्यवस्था प्रभावित हो रही है, बल्कि भविष्य में यह बड़े हादसों और कानूनी विवादों का कारण भी बन सकता है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि आवासीय क्षेत्रों में लगातार व्यावसायिक निर्माण हो रहा है, तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी है? क्या यह महज प्रशासनिक लापरवाही है या फिर प्राधिकरण और निर्माणकर्ताओं के बीच मिलीभगत का नतीजा? अब जरूरत इस बात की है कि एचआरडीए केवल नोटिस जारी करने की औपचारिकता तक सीमित न रहे, बल्कि मौके पर सख्त कार्रवाई करते हुए अवैध निर्माण को सील या ध्वस्त करे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!