HINDUSTAN NEWS TODAY, ऋषिकेश में विक्रम ऑटो यूनियन ने प्रस्तावित इलेक्ट्रिक सिटी बस (ई-सीटी बस) सेवा के विरोध में एक दिवसीय चक्का जाम किया। यूनियन के सदस्यों ने नगर निगम परिसर में अपने ऑटो खड़े कर प्रदर्शन किया और नारेबाजी की। उत्तराखंड विक्रम ऑटो रिक्शा, ई-ऑटो महासंघ के नेतृत्व में यह विरोध हो रहा है, जिसमें कई अन्य यूनियनों ने समर्थन दिया। चालक-मालिकों का कहना है कि नेपाली फार्म से लक्ष्मणझूला तक प्रस्तावित ई-बसों के संचालन से उनकी रोजी-रोटी पर गहरा असर पड़ेगा, क्योंकि ये बसें यात्रियों को आकर्षित कर लेंगी और छोटे वाहनों की कमाई प्रभावित होगी।
इस बीच, ऋषिकेश से पूर्व कांग्रेस विधायक प्रत्याशी जयेंद्र रामोल ने भी विरोध जताया। उन्होंने कहा कि पहले शहर की स्थिति सुधरे, फिर ई-बसों पर विचार किया जाए। रामोल ने बताया कि चारधाम यात्रा के समय विक्रम ऑटो को लक्ष्मणझूला तक जाने नहीं दिया जाता, जिससे आधे से ज्यादा समय जाम में निकल जाता है। इससे यात्रियों को परेशानी होती है और स्थानीय व्यापारियों का कारोबार प्रभावित होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि जहां पार्किंग और ट्रांसपोर्ट नगर की व्यवस्था होनी चाहिए थी, वहीं सरकार ई-बसें लाकर जाम की समस्या को और बढ़ा रही है। यात्रा सीजन में स्थानीय लोगों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है।
यह विरोध हरिद्वार तक फैल गया है, जहां विक्रम, ऑटो और ई-रिक्शा यूनियनों ने समर्थन में हड़ताल की। हरिद्वार में सुबह से ही रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर सवारी वाहन नहीं मिले, जिससे यात्रियों को भारी असुविधा हुई। चालक-मालिकों ने वाहनों के चक्के जाम कर नारेबाजी की। दोनों शहरों में यूनियनों की मांग है कि ई-बसों का संचालन रोका जाए, अन्यथा आंदोलन तेज होगा।
यह मुद्दा छोटे परिवहन व्यवसायियों की आर्थिक सुरक्षा और शहर की ट्रैफिक व्यवस्था से जुड़ा है। प्रशासन से वार्ता की मांग की जा रही है, लेकिन फिलहाल तनाव बरकरार है। ई-बसें पर्यावरण अनुकूल होने का दावा करती हैं, पर स्थानीय चालकों को लगता है कि इससे उनकी आजीविका खतरे में पड़ जाएगी।