हरिद्वार (गौरव कुमार) कौशल विकास योजनाओं के तहत युवाओं को रोजगार दिलाने के दावों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की हालिया रिपोर्ट में प्रशिक्षण प्रदाताओं द्वारा दिखाए गए रोजगार के कई दावे फर्जी पाए गए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार हरिद्वार जिले में एक प्रशिक्षण प्रदाता और एक शैक्षणिक संस्था ने सात संगठनों में 278 युवाओं को रोजगार देने का दावा किया था। जांच में पांच संस्थान तो पते पर मिले, लेकिन उन्होंने किसी भी अभ्यर्थी को नौकरी देने से इनकार कर दिया, जबकि दो कंपनियां पते पर मिली ही नहीं।
इसी तरह ऊधमसिंह नगर जिले में एक प्रशिक्षण प्रदाता ने चार संगठनों में 92 युवाओं को रोजगार दिलाने का दावा किया। एक दैनिक राष्ट्रीय अखबार ने भी इस खबर को प्राथमिकता के साथ भौतिक सत्यापन में दिए गए पते पर कोई भी कंपनी नहीं मिली।
कैग ने रिपोर्ट में कहा है कि रोजगार के दावों के सत्यापन की जिम्मेदारी संबंधित विभाग और कौशल विकास मिशन की थी, लेकिन इस दिशा में लापरवाही बरती गई। न तो दस्तावेजों का सही परीक्षण किया गया और न ही स्वतंत्र जांच कराई गई।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस तरह के मामलों से सरकारी धन की बर्बादी होती है और बेरोजगार युवाओं को वास्तविक लाभ नहीं मिल पाता। अब सरकार की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।
हरिद्वार में युवाओं के रोजगार के नाम पर फर्जीवाड़ा, कैग ने खोली पोल