HINDUSTAN NEWS TODAY, हरिद्वार। मकर संक्रांति से ठीक पहले बाजारों में प्रतिबंधित चाइनीज मांझा की खुलेआम बिक्री शुरू हो गई है। कनखल के चौक बाजार और ज्वालापुर के बाजारों में दुकानदार बेखौफ होकर इसे बेच रहे हैं, जहां कांच या धातु के चूरे से लेपित यह मांझा जानलेवा साबित हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि मुनाफे के लालच में व्यापारी लोगों की जान जोखिम में डाल रहे हैं, जबकि एनजीटी द्वारा 2017 से लगे प्रतिबंध की खुली अवहेलना हो रही है।
पिछले साल 2024 में चाइनीज मांझा से कई हादसे हुए, जिनमें निर्दोषों की जानें गईं। 30 दिसंबर 2024 को राजा गार्डन कॉलोनी के पास नमामी गंगे प्रोजेक्ट पर काम करने वाले 35 वर्षीय हाइड्रा ऑपरेटर अशोक कुमार की बाइक पर गर्दन में फंसकर मौत हो गई। 15 इसी तरह, 2 फरवरी 2025 को (2024 के अंत के करीब) गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के पास रेलवे के जूनियर इंजीनियर सुलेख चंद (58) की मांझे से गले कटने से मौत हो गई। 21 जनवरी 2025 में धीरवाली ज्वालापुर में एक बाइक सवार युवक की गर्दन कट गई। 4 पूरे हरिद्वार जिले में 2024-25 में 30 से अधिक लोग घायल हुए, जिनमें दो की मौत हुई। 19 इन हादसों ने परिवारों को तोड़ दिया, लेकिन प्रशासन की नींद अब भी टूटी नहीं।
विपक्षी दलों और ग्रामीणों का सवाल है कि कब होगा सख्त एक्शन? पुलिस ने जनवरी 2025 में छापेमारी कर 6500 बंडल जब्त किए और 23 मुकदमे दर्ज किए, 24 लेकिन बिक्री थम नहीं रही। विशेषज्ञों का कहना है कि रात के अंधेरे में आपूर्ति चोर दरवाजों से हो रही है। अब सवाल यह है कि क्या फिर किसी हादसे के बाद ही जागेगा सिस्टम? जन जागरूकता और सतत निगरानी से ही इस खूनी खेल को रोका जा सकता है, वरना और जानें जाएंगी।