देहरादून (गौरव कुमार) देशभर में जनगणना की अधिसूचना जारी होने के बाद उत्तराखंड में तैयारियां तेज हो गई हैं। यह पहली बार पूरी तरह डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें मोबाइल ऐप के माध्यम से डेटा संग्रह होगा और पेपरलेस प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
उत्तराखंड में जनगणना दो चरणों में होगी। पहला चरण मकान सूचीकरण और आवास गणना का है, जिसके लिए राज्य को 30 हजार गणना क्षेत्रों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक क्षेत्र में एक प्रगणक (मुख्यतः स्थानीय शिक्षक) तैनात होगा, जबकि हर छह प्रगणकों पर एक सुपरवाइजर निगरानी करेगा। देश के बड़े अखबार अमर उजाला ने भी अपनी वेबसाइट पर इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया है। इस खबर में इसी के अंश है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली राज्य स्तरीय सशक्त समिति ने मकान गणना 25 अप्रैल से 24 मई 2026 के बीच प्रस्तावित की है, जिस पर मुख्यमंत्री का अनुमोदन बाकी है।
दूसरा चरण जनसंख्या गणना का है। सामान्य क्षेत्रों में यह 9 से 28 फरवरी 2027 के बीच होगा, लेकिन हिमाच्छादित और दुर्गम इलाकों में सितंबर 2026 में पहले ही पूरा किया जाएगा। रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, चमोली और उत्तरकाशी जिलों के 131 गांवों तथा बदरीनाथ, केदारनाथ और गंगोत्री जैसे तीन कस्बों में सितंबर में ही काम होगा, ताकि बर्फबारी से पहले गणना हो सके।
इस बार कई नई सुविधाएं हैं। नागरिक स्वयं पोर्टल पर पंजीकरण कर अपनी जानकारी भर सकते हैं, जिसके बाद आईडी मिलेगी। प्रगणक आने पर इसे सत्यापित करेगा। सीएमएमएस पोर्टल से प्रगति लाइव ट्रैक होगी। प्रशासनिक सीमाएं फ्रीज हैं—31 दिसंबर 2025 की स्थिति मार्च 2027 तक लागू रहेगी, कोई तबादला या सीमा परिवर्तन नहीं होगा।
घोस्ट विलेज (गैर-आबाद गांव) के लिए भी टीम हर जगह पहुंचेगी। 2011 में 16,793 राजस्व ग्रामों में से 1,048 गैर-आबाद थे; इनकी गणना भी होगी, भले कोई न मिले। विषम क्षेत्रों में स्थानीय कर्मचारी ही काम करेंगे, हेलिकॉप्टर की जरूरत परिस्थिति अनुसार तय होगी।