हरिद्वार (गौरव कुमार) उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय परिसर में निर्माणाधीन परीक्षा विभाग भवन में सुरक्षा मानकों की खुलेआम अनदेखी सामने आई है। विश्वविद्यालय प्रशासन की नाक के नीचे चल रहे इस निर्माण कार्य ने सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, भवन की पांचवीं मंजिल पर मजदूरों से बिना किसी सुरक्षा उपकरण-जैसे हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट और जाल के काम कराया जा रहा है। यह स्थिति सीधे तौर पर श्रम कानूनों और निर्माण सुरक्षा मानकों का उल्लंघन है। सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि मौके पर नाबालिग बच्चों से भी काम कराए जाने के आरोप सामने आए हैं, जो बाल श्रम निषेध कानून की अवहेलना है।
निर्माण स्थल के आसपास मजदूरों के छोटे-छोटे बच्चे खेलते नजर आते हैं, जहां किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। सुरक्षा के लिहाज से न तो कोई बैरिकेडिंग है और न ही चेतावनी संकेत लगाए गए हैं।
गौरतलब है कि यह निर्माणाधीन भवन कुलपति कार्यालय और विश्वविद्यालय के सभागार के बिल्कुल पास स्थित है, जहां नियमित रूप से आईएएस अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की आवाजाही रहती है। इसके बावजूद इस गंभीर लापरवाही की अनदेखी प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करती है। अब बड़ा सवाल यह है कि यदि कोई हादसा होता है तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन की चुप्पी और ठेकेदार की मनमानी ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।