हरिद्वार। हरिद्वार उत्तराखंड वन विकास निगम के प्रभागीय लॉगिंग प्रबंधक रोहित श्रीवास्तव ने रविवार को कार्यालय में प्रेस वार्ता कर कर्मचारी संघ के लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए अपना पक्ष स्पष्ट किया।
उन्होंने कहा कि जनवरी 2025 में रवासन प्रथम पर जिस 18 लाख 88 हजार 700 रुपये के गबन का आरोप लगाया गया है, वह दो कर्मचारियों नवल किशोर गोसाई और चेतन सिंह रवि की व्यक्तिगत भूमिका से जुड़ा मामला है। इन दोनों पर विभागीय कार्रवाई करते हुए पहले ही निलंबन की कार्रवाई की जा चुकी है। श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया कि इस राशि में से 10 लाख रुपये निलंबित कर्मचारियों द्वारा उत्तराखंड वन विकास निगम के बैंक खाते में जमा कर दिए गए थे। शेष करीब साढ़े आठ लाख रुपये की रिकवरी का प्रकरण वर्तमान में कर्मचारी न्यायालय में विचाराधीन है। न्यायालय के अंतिम आदेश के बाद ही विभाग या निलंबित कर्मचारियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कर्मचारी संघ के अन्य आरोपों का भी खंडन किया। रवसान के द्वितीय गेट पर 18 लाख 30 हजार 987 रुपये तथा कटेबड़ गेट पर 20 लाख 13 हजार 292 रुपये के कथित घोटाले को पूरी तरह आधारहीन बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि संघ द्वारा जानबूझकर विभाग को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है, जबकि वास्तविकता में विभाग ने दोषी पाए गए कर्मचारियों पर त्वरित कार्रवाई की है।
श्रीवास्तव ने कहा कि विभाग पारदर्शिता और नियमों के अनुसार कार्य कर रहा है। न्यायालयीन प्रक्रिया पूरी होने पर शेष राशि की वसूली सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने संघ से आरोपों को साक्ष्यों के साथ प्रस्तुत करने को कहा है। ताकि अनावश्यक विवाद से बचा जा सके। इस दौरान वरिष्ठ सहायक हितेश कुमार सिंह, जीवन सिंह अनुभाग अधिकारी, आर्यन पांडे केएमएएस ऑपरेटर मौजूद रहे।
वन विकास निगम पर लगाएं कर्मचारी संघ ने लाखों रुपये घोटाले के आरोपों को बताया निराधार, संघ विभाग को कर रहा बदनाम : प्रभागीय लॉगिंग प्रबंधक