उत्तराखंड बीएसपी में बड़ा बदलाव: डॉ. नाथीराम को सौंपी गई प्रदेश अध्यक्ष की कमान,

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HINDUSTAN NEWS TODAY, हरिद्वार। बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने उत्तराखंड इकाई में बड़ा संगठनात्मक बदलाव करते हुए डॉ. नाथीराम को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है। पार्टी सुप्रीमो मायावती के इस फैसले से बसपा को राज्य की राजनीति में नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है, जहां भाजपा का दबदबा कायम है। डॉ. नाथीराम, जो साहब कांशीराम के साथ पार्टी की नींव मजबूत करने वाले नेताओं में से एक हैं, अब संगठन को एकजुट करने का दायित्व संभालेंगे। इससे पहले अमरजीत सिंह को अध्यक्ष बनाया गया था, लेकिन वे पांच महीने भी पूरे नहीं कर पाए और अचानक हटा दिए गए।
उत्तराखंड की राजनीति में बसपा का सफर चुनौतीपूर्ण रहा है। राज्य में अनुसूचित जाति (SC) की आबादी करीब 18 प्रतिशत है, जो BSP का मुख्य आधार है। 2022 विधानसभा चुनाव में BSP को दो सीट मिली, जिसमे लक्सर एवं मंगलौर थी। लेकिन आज एक लक्सर की में मात्र है। भाजपा ने 47 सीटें जीतकर सरकार बनाई और कांग्रेस 19 सीटों पर सिमट गई। 2017 में BSP ने एक सीट (जसपुर) जीती थी, लेकिन हाल के वर्षों में पार्टी का वोट शेयर घटकर 2-3 प्रतिशत रह गया है। डॉ. नाथीराम की नियुक्ति को दलित राजनीति को पुनर्जीवित करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। वे पूर्व प्रदेश अध्यक्ष चौधरी शीशपाल सिंह द्वारा महासचिव बनाए गए थे और जिला स्तर पर संगठन चलाने में कुशल माने जाते हैं। सोशल मीडिया पर उनके व्यवहारिक व्यक्तित्व की सराहना हो रही है, हालांकि कुछ कार्यकर्ताओं ने पूर्व पदाधिकारियों को प्राथमिकता न देने पर टीका-टिप्पणी की है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव 2027 विधानसभा चुनावों की तैयारी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में भाजपा ने UCC और लैंड जिहाद जैसे मुद्दों पर फोकस किया है। बीएसपी का लक्ष्य रूठे कार्यकर्ताओं को वापस जोड़ना और हरिद्वार, देहरादून, ऊधम सिंह नगर जैसे SC बहुल क्षेत्रों में मजबूती हासिल करना है। मार्च 2025 में नरेश कुमार गौतम को अध्यक्ष बनाया गया था, लेकिन लगातार बदलाव BSP की आंतरिक अस्थिरता दर्शाते हैं। बसपा सुप्रीमो मायावती का फैसला पार्टी हित में बताया जा रहा है, जो कांशीराम की विरासत को आगे बढ़ाएगा। डॉ. नाथीराम ने कहा, “पार्टी को मजबूत बनाना प्राथमिकता है।” इस नियुक्ति से बीएसपी उत्तराखंड में तीसरे विकल्प के रूप में उभर सकती है, जहां भाजपा और कांग्रेस का द्विध्रुवीय संघर्ष जारी है।

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