नसबंदी के बाद गर्भवती हुई महिला: हरिद्वार की दो डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप, उपभोक्ता आयोग ने लगाया 1.20 लाख जुर्माना

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HINDUSTAN NEWS TODAY, हरिद्वार। जिला उपभोक्ता आयोग ने एक चौंकाने वाले मामले में दो नामी डॉक्टरों – डॉ. संध्या शर्मा और डॉ. बरखा चंद्रा – पर चिकित्सकीय लापरवाही का आरोप सिद्ध होने पर 1 लाख 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। यह राशि मानसिक एवं शारीरिक क्षति के एवज में पीड़ित महिला को दी जाएगी।

मामले के अनुसार, पीड़ित महिला ने कुछ वर्ष पहले डॉ. संध्या शर्मा के यहां ट्यूबेक्टॉमी (महिला नसबंदी) ऑपरेशन कराया था। डॉक्टर ने उन्हें आश्वासन दिया कि ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा और अब बिना किसी गर्भनिरोधक उपाय के गर्भधारण नहीं होगा। इस भरोसे पर महिला ने कोई अतिरिक्त सावधानी नहीं बरती।

कुछ समय बाद महिला गर्भवती हो गई। जब उन्होंने डॉ. संध्या शर्मा से संपर्क किया, तो डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड और गर्भपात की सलाह दी तथा अस्पताल में 17 हजार रुपये जमा करने को कहा। बाद में महिला लीलागुप्ता हॉस्पिटल, ज्वालापुर पहुंची, जहां डॉ. बरखा चंद्रा ने भी तुरंत गर्भपात की सलाह दी और जान का खतरा बताकर 10 हजार रुपये जमा कराए।

25 फरवरी 2018 को महिला अस्पताल में भर्ती हुई। डॉ. बरखा चंद्रा ने अधिक मात्रा में दवाएं देकर गर्भपात कराने की कोशिश की, जिससे अत्यधिक ब्लीडिंग शुरू हो गई। ब्लीडिंग नहीं रुकने पर बिना सहमति के ऑपरेशन किया गया। बाद में ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत पड़ी, लेकिन डॉक्टर ने गलत ब्लड ग्रुप (‘A+’ की जगह ‘O+’) लिख दिया, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई।

महिला ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत दोनों डॉक्टरों के खिलाफ परिवाद दायर किया। उन्होंने 3 लाख रुपये चिकित्सा व्यय, 5 लाख मानसिक-शारीरिक क्षति और 20 हजार वाद व्यय की मांग की। आयोग ने लापरवाही सिद्ध मानते हुए दोनों डॉक्टरों को संयुक्त रूप से 1.20 लाख रुपये मानसिक क्षति के रूप में देने का आदेश दिया।

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