HINDUSTAN NEWS TODAY, हरिद्वार। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का महत्वाकांक्षी “नशा मुक्त उत्तराखंड” अभियान सिडकुल थाना क्षेत्र की फ्रेंड्स कॉलोनी, चोहान मार्किट में दम तोड़ता नजर आ रहा है। यहा घनी आबादी में दिन-दहाड़े खुलेआम अवैध अंग्रेजी और देशी शराब का काउंटर लगाकर बिक्री हो रही है। सबसे गंभीर बात यह है कि जिस आबकारी विभाग पर अवैध शराब रोकने की प्राथमिक जिम्मेदारी है, वही विभाग आंखें मूंदे बैठा है। बार-बार शिकायतों के बावजूद न तो छापेमारी हो रही है और न ही कोई कार्रवाई।
इस अवैध शराब की दुकान के ठीक बगल में एक निजी स्कूल है। सुबह स्कूल खुलते ही छोटे-छोटे बच्चे शराब पीते और बेचते लोगों के बीच से गुजरते हैं। सड़क पर बिखरी बोतलें, नशे में धुत लोग और गंदी भाषाएँ बच्चों के कोमल मन पर गहरा आघात कर रही हैं। मासूम बच्चे डरते-सहमें स्कूल आते-जाते हैं। अभिभावक चिंतित हैं कि उनके बच्चों का भविष्य नशे की इस छाया में खराब न हो जाए।
स्थानीय लोग बताते हैं कि पुलिस और आबकारी विभाग को कई बार लिखित-पत्र और फोन पर शिकायत की गई, लेकिन हर बार जवाब मिलता है “कार्रवाई की जाएगी” और फिर खामोशी। उल्टे, अगर कहीं चार पेटी शराब बाहर मिल जाए तो लाइसेंसी दुकान को कुछ घंटों के लिए सील कर दिखावटी कार्रवाई कर ली जाती है, लेकिन स्कूल के बराबर में चल रहे इस खुले अवैध अड्डे पर कोई ध्यान नहीं।
यह दोहरा मापदंड और आबकारी-पुलिस की मिलीभगत साबित करता है कि नशा मुक्त उत्तराखंड का सपना केवल कागजों और भाषणों तक सीमित रह गया है। अगर घनी आबादी और स्कूल के बीच चल रही इस अवैध शराब बिक्री पर तत्काल प्रतिबंध नहीं लगा तो मुख्यमंत्री का अभियान जनता की नजरों में मजाक बनकर रह जाएगा। बच्चों का भविष्य दाँव पर है।